एक ऐसे जीव का पता चला है जो ऑक्सीजन के बगैर रहता है

स्कूल से लेकर कॉलेज की किताबों में पढ़ते आए हैं कि ऑक्सीजन (life without oxygen) के बिना जीवन नहीं हो सकता. ये बात धरती पर रहने वाले जंतुओं और इंसानों से लेकर पानी और हवा में रहने वाले पक्षियों पर भी समान रूप से लागू होती है. हालांकि हाल ही में एक चौंकाने वाली रिसर्च (research) में एक ऐसे जीव का पता चला है जो ऑक्सीजन के बगैर जी सकता है. सेलमन मछली के भीतर मिले इस परजीवी 'हेनेगुया सालमिनिकोला' की खोज से सदियों से चली आ रही सारी वैज्ञानिक धारणाएं हिल गई हैं और वैज्ञानिक नए सिरे से सोचने लगे हैं कि हो सकता है कि इस बहुकोशिकीय जीव की तर्ज पर आगे चलकर हम सब भी बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह सकें.


National Academy of Sciences में छपी इस स्टडी के अनुसार ये समुद्री जीव जैलीफिश की तरह दिखता है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसे जीने के लिए सांस लेने की ही जरूरत नहीं पड़ती है. अब ऐसे अनोखे जंतु की खोज के बाद वैज्ञानिक इस दिशा में खोज की तैयारियां करने लगे हैं कि शायद ऑक्सीजन विहीन उन दूसरे ग्रहों पर भी कुछ इसी तरह का जीवन हो जो अब तक हमें दिखाई न दिया हो.
सेलमन मछली में पाए जाने वाले दूसरे बैक्टीरिया की तरह ये इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है



इसी साल 24 फरवरी को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के जरिए वैज्ञानिकों ने बताया कि  हेनेगुया सालमिनिकोला (Henneguya salminicola) नाम से जाना जाने वाला ये जीव सेलमन मछली के शरीर में परजीवी की तरह रहता है. 10 कोशिकीय सैलमिनिकोला अपने आप को इस हद तक अनुकूलित कर चुका है कि इसे सांस लेने की जरूरत नहीं होती है. इस बारे में इजराइल की Tel Aviv University की वैज्ञानिक Dorothée Huchon ने बताया कि इवॉल्यूशन यानी क्रमिक विकास इस हद तक भी हो सकता है, इसका खुद वैज्ञानिकों को भी अंदाजा नहीं था.



इस खोज से ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है कि आगे चलकर बहुकोशिकीय जीवों को जीने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत खत्म हो जाए.
ये मीठे और खारे दोनों तरह के पानी में परजीवी की तरह रह सकता है



वैसे ये अब तक समझ नहीं आ सका है कि ये परजीवी किस तरह से अपने लिए ऊर्जा पैदा करता है. जैलीफिश की तरह दिखने वाले इस परजीवी की एक और खासियत है कि ये मीठे और खारे दोनों तरह के पानी में रह सकता है यानी ये myxozoan है. लेकिन सेलमन मछली में पाए जाने वाले दूसरे बैक्टीरिया की तरह ये इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है.इससे पहले तक वैज्ञानिक इसी बात पर यकीन करते रहे थे कि क्रमिक विकास यानी इवॉल्यूशन के दौर में एककोशिकीय जीव धीरे-धीरे बहुकोशिकीय जीवों में बदल जाते हैं और उनकी शारीरिक संरचना ज्यादा जटिल होती जाती है. दूसरी तरफ मछली के शरीर में पाए जाने वाले इस 10 कोशिकीय जीव को देखने पर ये वैज्ञानिक सिद्धांत गलत साबित होता दिख रहा है.